Monthly Archives: नवम्बर 2012

दीवाली तो अपने घर की ही मनाउंगी।

याद बहुत आती है उन दीयों की , जो रखे थे खुद मैंने अपने आँगन में , तेल की जगह ममता थी मेरी , प्रकाश मेरी भावनाओं का था , पंक्ति में लगा के जब सजाती थी दिए, आँखें सदा … पढना जारी रखे

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