Monthly Archives: अप्रैल 2013

मूढ़ जनता क्या जाने कि मीडिया क्या है, कैसे हवा बनानी है, कैसे बहानी है ?

  पर इतना जरूर जानती है की वही घिसा-पिटा गाना रोज कोई ना कोई सुनाने इस फोर “जी’ के जमाने में आ जाता है, ‘’ बोलीवूड और तुम चोर हम सिपाही ‘’ के स्पष्ट प्रभाव से युक्त  कार्यक्रम आखिर कितनी … पढना जारी रखे

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‘’ जींस और स्कर्ट से परिभाषित होती योग्यता ‘’ ?

  लीजिये फिर उछाल दिए गए जुमले पे जुमले की बाँध को …… से भर दें क्या , एक कंपनी ने फरमान जारी कर दिया जींस और स्कर्ट का , पंगा तो होना था सो मोहतरमा ने चिपका दिया झन्नाटेदार … पढना जारी रखे

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‘’ रीमेक का ज़माना है भाई , ओरिजिनल काहे ढूंढें रे मन ‘’

रीमेक पे रीमेक , जिसने ओरिजनल देखा उसे रीमेक में आनंद काहे और कैसे आयेगा , या फिर सब कुछ बेच चुकने के बाद अखबार की रद्दी पर आखरी दाँव लगाते से व्यापारी की हालत हो गई है , अरे … पढना जारी रखे

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…मेरा अज्ञानी होना मेरे ज्ञानी होने ज्यादा महत्वपूर्ण है और श्रेष्ठ है |

‘’ शाब्दिक अर्थों में गुम होते भारतीय ज्ञान , दर्शन, विज्ञान “( चिंता है आरोप नहीं ) क्योंकि नव-निर्माण (व्यक्तिगत और सामाजिक ) की जगह समय के प्रत्येक पल में होती है | प्रत्येक कर्म आस्था से जुड़ा होता है, … पढना जारी रखे

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