Monthly Archives: अगस्त 2013

उत्तराखंड विप्लव की पृष्ठभूमि में….’

उत्तराखंड विप्लव की पृष्ठभूमि में….’ ‘’ सामाजिक मीडिया पर जनता की आवाज कुछ इस तरह गूँज रही है “ हिन्द को नाज था वो पेप्सी कहाँ है , दुनिया कर के मुठ्ठी में वो सोये कहाँ हैं कहाँ है वो … पढना जारी रखे

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‘’ वसुधेव कुटुम्बकम ’’ जिसे विश्व अपना रहा है हम उस से दूर जा रहे है मात्र कुछ त्वरित स्वार्थ-पूर्ती की लालसा में सम्पूर्ण जन-मानस को गलत राह दिखा कर ?

‘’सीमित होती निरपेक्षता और भारत का सम्मान ‘’ भारतवर्ष को सम्मान सदैव उसके ‘’ वसुधेव कुटुम्बकम ’’ के विचार को प्रचारित एवं तदनुसार जीवन में उतारने के कारण मिला है, इस सम्मान का दूसरा दारुण पक्ष यह भी की सदियों … पढना जारी रखे

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अब तो रहम कीजिये हुजूर गर्दभराज भी मुस्कुराने लगे हैं

“” गर्दभराज को हिंदी साहित्य में सम्माननीय स्थान प्राप्त है “ जिम्मेदारी से लदे शांत वो चले जा रहे थे | आँखों ही आँखों में मुस्कुरा रहे थे || पीड़ा जो मुस्कराहट में नजर आ रही थी | सन्देश गर्दभराज … पढना जारी रखे

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जिम्मेदार नागरिक होने को रेखांकित करता है |

कमजोर विरोधिओं को लालच और प्रशंशा के माध्यम से परजीवी होने के अँधेरे रास्ते पर धकेलना सत्ता समीकरण हल करने का दूसरा अचूक तरीका है इस छोटे रास्ते से बड़ी सफलताएं अकसर हासिल की जाती रही हैं | जन मानस … पढना जारी रखे

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धन्यवाद : उन्होंने हमें अपनी लाश अपने कन्धों पर रख कर चलना जो सिखा दिया |

’’’ जाइए हमें आप से कोई शिकायत नहीं “” काल-कवलित हजारों हो गए , जाने कितना तड़प जिंदगी से मेरी एक झटके में, जुदा वो मुझ से हो गए , लाशें भी कराहीं अंतिम संस्कार को , जिम्मेदार संवेदनशील कुछ … पढना जारी रखे

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‘’ प्रतिष्ठा , प्रतिष्ठा ,और प्रतिष्ठा ‘’

‘’ प्रतिष्ठा , प्रतिष्ठा ,और प्रतिष्ठा ‘’ इस पूंजीवादी युग में केवल प्रतिष्ठा प्राप्त करने के लिए कुछ भी करना जायज सा होता जा रहा है| सामाजिक,पारिवारिक यहाँ तक की व्यक्तिगत उन्नति के वो सारे नियम जो बनाए थे उन्हें … पढना जारी रखे

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‘’रावण’’ तू क्यों शर्माता है ?

फिर ‘’रावण’’ तू क्यों शर्माता है ? दामिनी जब भी दारुण दुःख से गुजरे , विकल मन क्यों होता है ? सड़ती लाशें देव-भूमि में , ह्रदय बंद क्यों होता है ? चिपके पेटों से जा कर पूछो तो , … पढना जारी रखे

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