Monthly Archives: अगस्त 2013

गुस्से में जब कुछ याद आ गया , कागज़ को सजा दे दी यूँ ही हमने

कोई अगर ये सोचे कि वो , भारतीयों की किस्मत में केवल ‘’ श्रद्धांजलि ‘’देना  लिख सकता है तो वो एकदम गलत सोचता है | सर्वस्व लुटाने वाला , लुटेरों से सदैव श्रेष्ठ रहा है और रहेगा |             जय … पढना जारी रखे

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हाँ हम मरने आते हैं, हाँ हम मिटने आते हैं

हाँ हम मरने आते हैं, हाँ हम मिटने आते हैं लिप्सा भोग के गुलाम नहीं हम, सर्वस्व लुटाने आते हैं तुम तो ठहरे निर्भर वोटों पर, हम स्वाभिमान सजाने आते हैं कसम तुम्हे मत सजदा करना मेरा , कलंकित ना … पढना जारी रखे

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‘’ निकृष्ट कहे गए कर्म सोने की खदान “

‘’ निकृष्ट कहे गए कर्म सोने की खदान “ कर्म और कर्म के प्रकार , किसी ने कहा है ‘’ विहित कर्म से विमुख का सर्वनाश तय है ‘’ बहुत अधिक समय नहीं हुआ जब कुछ कार्यों को निकृष्ट कहा … पढना जारी रखे

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हमें क्या चाहिए ?

हमें क्या चाहिए ? ‘’ अनुदान ‘’ ?  ‘’ खैरात ‘’ ?   या ‘’ रोजगार ‘’ ? अनुदानों पर जीवन जो पलते धरा पर, समृद्ध ना वो कभी करते जगत को | अनुदान प्राप्त करना या दयावश अनुग्रह प्राप्त … पढना जारी रखे

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