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“अहम् के सौन्दर्य का उपादान – निराशा की गर्त में जन मानस”

1.मासूम भोली सी मुस्कान लिये क्या गुनाह था उस भोली मुस्कान का , क्या खता थी उन मासूम सपनों की, क्या खता थी उस पिता की , जिसने अरमानो से उसको पाला , कैसे माँ वो सह पाती होगी , … पढना जारी रखे

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